सीटे नहीं भरने के कारण पूरे देश में 800 इंजीनियरिंग कॉलेज होंगे बंद

भारत जैसे देश में इंजीनियरिंग के हालात अब कैसे हो गए हैं कि पूरे देश में लगभग कम एडमिशन होने के कारण 800 इंजीनियरिंग कॉलेज बंद होने के कगार पर हैं। ऑल इंडिया काउंसलिंग फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) ने ऐसे सभी कॉलेजों को बंद करने का फैसला किया है जिनमें सीटें नहीं भरी है और उनमें हर साल एडमिशंस में कमी हो रही है।

इंजीनियरिंग कॉलेजों के बंद होने का सिलसिला आज ही से शुरू नहीं हुआ बल्कि इससे पहले भी 416 कॉलेज बंद किए जा चुके हैं । इनमें से सबसे ज्यादा कॉलेज तेलंगाना में है , उसके बाद महाराष्ट्र में ऐसे कॉलेज हैं जिनको बंद किया गया है, यह सभी जानकारी एआईसीटीई की वेबसाइट के अनुसार है।

 उत्तराखंड में क्या हाल है इंजीनियरिंग कॉलेज का :  उत्तराखंड में इंजीनियरिंग कॉलेजों का हाल भी कुछ खास नहीं है। उत्तराखंड में इस वर्ष 12507 इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली रही जबकि काउंसलिंग दो बार हुई है और इनमे से केवल ढाई हजार सीटें ही पूरी हुई है यही नहीं बल्कि प्राइस सरकारी कॉलेजों में भी ज्यादातर सीटें खाली रही। उत्तराखंड में केवल 7 इंजीनियरिंग कॉलेज है जिसमें केवल 30% से भी कम प्रवेश हुए हैं पिछले सालों कई सालों से भी यहां 30% से कम ही इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश हुआ है। यहां तक कि अब तो यहां ऐसा सिस्टम लागू हो गया है कि अब इंजीनियरिंग में पहले आओ पहले पाओ के आधार पर भी एडमिशन मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश में भी कुछ खास नहीं है इंजीनियरिंग कॉलेजों की हालत: देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में 100 से भी ज्यादा इंजीनियरिंग और मेडिकल मैनेजमेंट कॉलेजों में प्रवेश की स्थिति बहुत खराब है इन कॉलेजों में उत्तराखंड से भी कम मतलब 25% से भी कम इसमें प्रवेश हुए हैं उत्तर प्रदेश में 29 कॉलेज तो ऐसे हैं जहां एक भी एडमिशन नहीं हुआ है अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू )से जुड़े प्रदेश के लगभग 600 इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट संस्थान है इस बार शुरू से ही इन में कई कॉलेजों में एडमिशन के लाले पड़ रहे हैं लगभग डेढ़ महीने तक चली ऐसी काउंसलिंग के माध्यम से 18000 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है।

क्या कारण है इंजीनियरिंग कॉलेजों के बंद होने का: इंजीनियरिंग कॉलेजों का बंद होने का सबसे बड़ा कारण है कि शिक्षकों की कमी जो शिक्षकों का लेक्चर होता है उस पर कई छात्रों को बोरियत आती है शिक्षक की गुणवत्ता और रोजगार भी इससे कम होने लगे हैं मौजूदा शिक्षकों को अभी 3 साल की ट्रेनिंग दिया जाएगा । काउंसलिंग का मानना है कि ज्यादातर शिक्षकों के पास ज्यादा अनुभव नहीं है , जिससे वह अच्छे ढंग से छात्रों को पढ़ा नहीं सकते हैं और आगे जाकर छात्रों को रोजगार भी नहीं मिल पाता है।
एआईसीटीई का मानना है कि इंजीनियरिंग कॉलेज में लगातार 30% से भी कम सीटें भरने पर उसे बंद कर दिया जाता है इस में नए दाखिले नहीं करना और पुराने विद्यार्थियों का कोर्स ख़त्म होते ही कॉलेज बंद कर देना ऐसा आर्डर होता है ऐसे कॉलेजों को पॉलिटेक्निक कि यहां सामान्य कॉलेज के रूप में चलाया जाता है।
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